सुबह कहती है जो बीत गया, उसे भूल जाओ; हर दिन को नया अर्थ देने से ज्यादा सुंदर जीवन में कुछ नहीं: अमिताभ बच्चन

टाट्रा. स्लोवाकिया-पोलैंड की सीमा पर माउंटेन रेंज टाट्रा। बीती 9 दिसंबर की रात जब हम यहां पहुंचे तो बर्फीले तूफान ने घेर लिया। पारा माइनस 14 डिग्री जा पहुंचा। अगले दिन यहीं पर फिल्म ‘चेहरे’ के लिए बच्चन साहब पर एक दृश्य फिल्माया जाना था। मैं उनकी सेहत को लेकर चिंतित था। पर अगली सुबह वे सबसे पहले लोकेशन पर पहुंचे। सात दिन उनके साथ रहने के दौरान मैंने कभी तड़के तो कभी आधी रात भी उनसे जाना कि 77 की उम्र में भी वे खुद को री-इनवेंट कैसे करते हैं। पढ़िए उन्हीं की जुबानी-

इंडस्ट्री में मुझे 50 साल हो गए हैं। मैं आज भी यह अनुभव करता हूूं कि हर सुबह सिखाती है, कि रात बीतने और सुबह होने के बीच अंधेरा मिट चुका है। हर दिन कुछ नया सीखने, कुछ भूलने, पुरानी आदतें छोड़ने और कुछ नया रचने का अपूर्व अवसर लेकर आता है। अगर मन में यह गूंजबस गई तो विश्वास हो जाता है कि जो भी करेंगे, कदम जीत की ओर ही बढ़ेंगे। मेरा मानना है कि हर दिन एक आशीर्वाद है, जो भरपूर ऊर्जा लेकर आता है। विचारों का यही क्रम हर दिन सकारात्मकता और रचनात्मकता से भरपूर रखता है। मैं इसे अनुभव करता हूं।

सुबह की ताजा हवा की तरह युवा भी मुझे सिखाते हैं। नई सदी का युवा मानता है कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है और मैं उनकी इस खूबी का प्रशंसक हूं। वास्तव में युवाओं की जोखिम लेने की भावना और उनका साहस मुझे हमेशा आकर्षित करता है। मुझे उम्मीद है कि युवा इसी तरह अभय रहेंगे और इसमें कोई संशय नहीं है। बस वे व्यस्त रहें, खूब सोचें और स्वयं पर भरोसा करें। अपने लक्ष्य पर अडिग रहें।

मेरा मानना है कि जब कमिटमेंट के साथ मन में संकल्प होता है तो कोई बाधा रोक नहीं सकती। फिर चाहे आपकी उम्र ज्यादा हो, बर्फीला तूफान हो या पारा माइनस 14 डिग्री से नीचे ही क्याें ना चला गया हो। जो वचन खुद को दिया है, उसे तो पूरा करना है। मैं तो एक ही बात मानता हूं कि उम्र सिर्फ एक खयाल है। शरीर हर समय ऊर्जावान रहने में सक्षम है, बस मन कमजोर न होने पाए। इस तरह जीवन को हर दिन एक नया अर्थ देने से अधिक खूबसूरत और कुछ भी नहीं है। इसीलिए जिंदगी के आखिरी दिन तक ऊर्जावान होकर काम करना है। कर्म करते जाना है। सफलता कब स्थाई हुई है। उतार-चढ़ाव से सब को गुजरना है। इस मामले में मैं भी किसी से अलग नहीं हूं। जब आप अपने काम में आनंद तलाश लेते हैं तो जिंदगी सफलता-असफलता के पैमानों से परे निकल जाती है। यही सबसे बड़ी जीत है।

ईमानदारी से निर्णय लें और उस राह पर आगे बढ़ें
सभी की तरह मैं भी जीवन में दुख और दर्द से गुजरा हूं। यह जरूरी नहीं है कि इंसान यदि जी रहा है तो किसी निश्चित प्रेरणा की वजह से ही जी रहा है। जीवन की कुछ आकांक्षाएं हैं तो कुछ आवश्यकताएं भी। उन्हें निभाने के लिए ईमानदारी से बहुत सारे निर्णय लेने के बाद हम उस राह पर चलना शुरू कर देते हैं। मेरी प्रेरणा यह रही है कि मैं नेक इंसान की तरह जिऊं।



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Amitabh Bachchan; Bollywood megastar Dadasaheb Phalke Awardee Amitabh Bachchan Bhaskar Exclusive On Reinvent Yourself Successfully


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